कर्नाटक के तुमकुरू जिले में समाज कल्याण विभाग के असिस्टेंट डायरेक्टर ने अपने ऑफिस में ही फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। मरने से पहले अफसर ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें सीनियर अधिकारी पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। अधिकारी की पहचान मल्लिकार्जुन की रुप में की गई। पुलिस ने बताया कि मृतक मल्लिकार्जुन पावागड़ा शहर में समाज कल्याण विभाग के दफ़्तर में छत के पंखे से लटके हुए पाए गए।
सुसाइड से पहले वीडियो मैसेज जारी किया
पुलिस ने बचाया कि सुसाइड से पहले अधिकारी ने अपने मोबाइल फ़ोन से खुद ही एक वीडियो रिकॉर्ड किया था। इस वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि संयुक्त निदेशक कृष्णप्पा द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न के कारण ही उन्हें यह फ़ैसला लेने पर मजबूर होना पड़ा। पुलिस ने बताया कि मल्लिकार्जुन पावागड़ा के गुंडरलहल्ली के रहने वाले थे। वीडियो में उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मां, पत्नी और बच्चों ने उनका बहुत अच्छे से ख़्याल रखा था। उन्होंने कहा कि ईश्वर और क़ानून, उनके वरिष्ठ सहकर्मी को उनके कृत्यों के लिए सज़ा ज़रूर देंगे। कृष्णप्पा के खिलाफ मृतक के परिजनों ने शिकायत दर्ज कराई है।
संयुक्त निदेशक कृष्णप्पा को बताया सुसाइड के लिए जिम्मेदार
पावागड़ा तालुक के गुंडारलाहल्ली गांव के रहने वाले मल्लिकार्जुन पिछले तीन सालों से इस विभाग में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे। इस बीच, मीडिया को मिले दस्तावेज़ों से पता चलता है कि 12 मार्च को, कुछ शिकायतों के बाद जॉइंट डायरेक्टर कृष्णप्पा ने मल्लिकार्जुन के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। आदेश में साफ़ तौर पर कहा गया था कि उन पर लगे आरोपों की जांच के लिए अधिकारियों की एक टीम भी बनाई गई है। पावागड़ा में समाज कल्याण विभाग के अधिकारी मल्लिकार्जुन की आत्महत्या के बाद, टुमकुरु ज़िला विभाग के संयुक्त निदेशक कृष्णप्पा ने एक वीडियो जारी करते हुए उन पर लगे आरोपों को गलत ठहराया।
मृतक मल्लिकार्जुन के खिलाफ दिए थे जांच के आदेश
कृष्णप्पा का दावा है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मल्लिकार्जुन को किसी भी तरह से परेशान नहीं किया था और न ही कभी उनके दफ़्तर जाकर कोई निरीक्षण किया था या कोई नोटिस जारी किया था। उन्होंने कहा है कि बेंगलुरु मुख्यालय से मिली एक शिकायत के आधार पर एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था और जांच के लिए दो कर्मचारियों को नियुक्त किया गया था, हालांकि जांच अभी शुरू नहीं हुई थी।
कृष्णप्पा ने यह भी कहा कि मल्लिकार्जुन की सेवानिवृत्ति में केवल दस दिन शेष थे, इसलिए उनकी पेंशन पर कोई असर पड़ने की कोई संभावना नहीं थी और वास्तव में उन्होंने उनके पेंशन प्रस्ताव का समर्थन किया था और उसे सत्यापित भी किया था। इस मौत को संदिग्ध बताते हुए, कृष्णप्पा ने आग्रह किया कि इस घटना के पीछे की सच्चाई सामने लाई जाए।